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फ़रवरी 21, 2017

पत्रकारिता को परिभाषित करने की है जरूरत ....

मुकेश कुमार सिंह की दो टूक---
आज पत्रकारिता और पत्रकार दोनों को परिभाषित करने की जरूरत है ।पूर्व की पत्रकारिता और आधुनिक पत्रकारिता का ढांचा बिल्कुल बदल गया है । हमारी समझ से पत्रकार कभी दलाल नहीं हो सकते और दलाल कभी पत्रकार नहीं हो सकते ।पत्रकार का सही अर्थ है देश और दुनिया का आईना ।हालिया दिनों में पत्रकारों के साथ दुर्व्यवहार और उत्पीड़न के मामले में लगातार तेजी आई है ।यह मसला बेहद गंभीर है ।आखिर क्या वजह है जो हमारे साथियों के साथ ऐसे हालात पैदा हो रहे हैं ?
इस गंभीर विषय पर आत्मचिंतन,आत्ममंथन और सामूहिक विचार--विमर्श की जरूरत है ।पत्रकारों के साथ घटित हो रही घटनाओं का अवलोकन और घटना की वजह की तह में उतरना बेहद जरुरी है ।हमें पीड़ित पत्रकार साथी की हर सम्भव मदद करनी है लेकिन घटना की वजह को परत दर परत उकेरना भी जरुरी है ।हमारी समझ से पात्र देखकर मदद की पहल की जानी चाहिए ।अनजाने और भावावेश में बिना सच्चाई को टटोले मदद करने की कोशिश,कहीं से भी जायज नहीं है ।
हम दृढ संकल्पित हैं की हम पीड़ित पत्रकार साथी की हर सूरत में ना केवल मदद करेंगे बल्कि उनके साथ पूरा न्याय हो,इसकी भी मुकम्मिल लड़ाई लड़ेंगे ।लेकिन हमारा सुझाव है की जिस साथी के साथ किसी तरह की घटना घटी है,उसकी पहले तटस्थ पड़ताल करा लें ।हम अपने अनुभव के आधार पर कहना चाहते हैं की कभी---कभी अँधेरे में रहकर हम ऐसे शख्स की मदद कर डालते हैं,जो आगे हमारे लिए नुकसान का सबब बन जाते हैं ।खुले सफे और बेहद साफ लहजे में हम कहना चाहते हैं की पात्र देखकर मदद की परिपाटी शुरू करें ।

आलोचना और उपलब्धि को समझना है बेहद जरुरी


आलोचना और उपलब्धि को लेकर अक्सर संसय रहता है बरकरार 
आलोचना से घबराकर उपलब्धि के ग्राफ में आती है कमी,धार भी होती है कुंद
आलोचना उपलब्धि की जमापूंजी को तराशने का है सबसे मजबूत हथियार
अपनी हर तरह की कमी को आलोचना से हम कर सकते हैं दूर
आलोचना और निंदा का आपस में नहीं होता कोई तारतम्य
आलोचना और निंदा को एक समझना,है एक बड़ी भूल और गलती 
मुकेश कुमार सिंह की पड़ताल---
सबसे पहले आलोचना को जानना और समझना जरुरी है ।अक्सर और अमूमन लोग आलोचना और निंदा को एक ही अर्थ में लेते हैं ।आलोचना और निंदा दो चीजें हैं ।निंदा से एक इंसान दूसरे को बस नीचा दिखाने की हर जुगत करता है ।निंदा से लोगों को यह भरम होता है की वह अब दूसरे को पछाड़ कर अपने से कमतर साबित करने में सफल हो जाएगा ।निंदा इंसान की बेहद ओछी फितरत है ।इंसान अगर थोड़ा भी सही होगा तो वह निंदा जैसी घृणित सोच से बचना चाहेगा । 
इस आलेख में अब निंदा पर अधिक चर्चा करना जायज नहीं है । इससे विषयांतर की संभावना बढ़ेगी ।हम विषय पर लौटते हैं ।हमारा आज का विषय है "आलोचना और उपलब्धि" ।आलोचना और उपलब्धि एक दूसरे के अभिन्न मित्र हैं ।जहाँ उपलब्धि होगी वहाँ आलोचना भी निश्चित होगी ।हमारी समझ से बिना आलोचना के उपलब्धि का कोई सार्थक और कालजयी महत्व नहीं हो सकता है ।इसलिये जब भी कहीं आपकी आलोचना हो रही हो,तो इससे कभी हताश,निराश या फिर खिन्न नहीं होना चाहिए बल्कि ये सोचना चाहिए की आपका प्रयास कहीं ना कहीं तीव्रता से सफल हो रहा है और आप अपनी तयशुदा मंजिल के बेहद करीब हैं ।जो लोग हमारी आलोचना करते हैं,वह ये भूल जाते हैं कि कहीं ना कहीं वह हमारा फायदा ही कर रहे हैं ।
 आलोचना से वह,हमें और मजबूत बनने के लिये प्रेरित कर रहे हैं ।जाहिर सी और दीगर बात है की बिना आलोचना के हम अपनी कमियों को कभी भी आसानी से नही जान पाते ।विरोध होने पर ही हमें पता चलता है कि हमसे कहाँ चूक हुई है ।यदि विरोध यानि आलोचना सही है तो फिर गुंजाईश के मुताबिक खुद को बदलें ।यदि विरोध यानि आलोचना गलत हो रही है,तो अपनी पूरी ऊर्जा से अपने को सही साबित करने के लिये सदैव प्रयत्नशील रहें ।एक बात हमेशा याद रखना चाहिए की "ईश्वर ने हमको बहुत कुछ दिया है । ऐसा कोई भी सांसारिक कार्य नही है जो इंसान नहीं कर पाये"।जब भी मन में शंका पैदा हो,तो आत्ममंथन कीजिये और खुद को पहचानने की कोशिश कीजिये ।सिद्दत से सोचिये की "मैं कौन हूँ "और मैं क्या कर सकता या कर सकती हूँ ।यकीन मानिये आपको ना सिर्फ अपनी पहचान मिलेगी बल्कि ज़िन्दगी जीने का सही मकसद भी मिलेगा । इसलिये कभी भी आलोचना या विरोध से घबरायें नहीं ।विरोध तो युग--युगांतर से होता आ रहा है और होता ही रहेगा ।
इसलिये "सत्यम् परम धीमहि" के सिद्धान्त पर चलकर अपने संघर्ष को आगे बढ़ाएं ।आप बहुत अच्छे कार्य कर रहे हैं,इसका सफल मूल्यांकन आपसे हो पाना ना तो संभव है और ना ही उचित है ।आपके कृत्यों,व्यवहार, आचरण और समूल वृतियों पर आमलोगों की धारणा और फिर उसकी समीचीन आलोचना बेहद जरुरी है ।हम अपने व्यक्तित्व को बेहतर से बेहतर इसलिए बनाते हैं की उसका उपयोग सांसारिक जीवन में लोग करें ।इसके लिए बेहद जरुरी है की लोग परत दर परत हमें हर तरह से ठोंके--बजाएं और हमें खंगालें ।कोयले के बीच से हीरा निकलता है ।लोग जितनी हमारी आलोचना करेंगे,उससे हम अपनी इल्म की टकसाल में और खुलकर तपेंगे । आलोचना से हमारी उपलब्धि का दायरा निरंतर बढ़ेगा ।आलोचना को शगुन के रूप में लिया जाना चाहिए ।आखिर में हम ताल ठोंककर कहते हैं की बिना आलोचना के मजबूत पहचान मिलनी नामुमकिन है ।चर्चा और आलोचना मुर्दों की नहीं होती है बल्कि उनकी होती है,जिनमें जान होती है । सटीक,सार्थक,इल्मी,मौलिक,नैसर्गिक,तटस्थ, पारदर्शी और आसमानी वजूद के लिए आलोचना बेहद और निहायत जरुरी है ।

महिला राजद कार्यकारिणी का गठन

विकास कुमार की रिपोर्ट -----
सहरसा जिले में आज मंगलवार को जिला राजद महिला प्रकोष्ठ की बैठक आयोजित की गयी। बैठक की अध्यक्षता करते हुए राजद महिला जिलाध्यक्ष विजयलक्ष्मी ने कहा कि जबसे उन्हें महिला प्रकोष्ठ का प्रभार दिया गया है। तब से वे लगातार पंचायत से लेकर प्रखंड स्तर तक पार्टी को मजबूत करने के लिए मजबूत प्रयास कर रही हैं। 
राजद महिला संगठन पार्टी प्रमुख लालू प्रसाद यादव के संदेश को आम लोगों तक पहुंचाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा सरकार के द्वारा चलायी जा रही योजनाओं को आम लोगों तक पहुंचाने में जो पदाधिकारी शिथिलता बरत रहे हैं उनके विरुद्ध महिला संगठन संघर्ष करेगी। 
इस मौके राजद के वरीय उपाध्यक्ष पूर्व मंत्री सह कोसी प्रमंडल के प्रभारी अशोक कुमार सिंह ने कहा कि पहली बार राजद महिला संगठन का विस्तार जिला से लेकर प्रखंड स्तर तक किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनता दल खासकर महिलाओं के हित में जो नीति बनाती है वह उनके पास नहीं पहुंच पाती है। संगठन के माध्यम से पार्टी और सरकार स्तर पर से जो भी कल्याणकारी कार्यक्रम होंगे वह आसानी से महिलाओं के बीच ले जा सकते हैं। आयोजित बैठक में जिला राजद महिला प्रकोष्ठ कार्य समिति का गठन किया गया जिसमें जिलाध्यक्ष विजयलक्ष्मी के अलावा उपाध्यक्षा नुतन देवी, नवीता देवी, महासचिव दीपमाला राय व हलीमा प्रवीण, सचिव सुनीता देवी, मणिवाला देवी, लक्ष्मी देवी, लीला देवी व कल्पना देवी, कोषाध्यक्ष पूनम देवी सहित अन्य सदस्यों को नियुक्त किया गया। इसके अलावा सोनवर्षा प्रखंड अध्यक्षा रुबी कुमारी, बनमा ईटहरी प्रखंड अध्यक्षा पूनम कुमारी, पतरघट प्रखंड अध्यक्षा पुष्पलता देवी, सौरबाजार प्रखंड अध्यक्षा अरुणा देवी, सतरकटैया प्रखंड अध्यक्षा रीना भारती, नवहट्टा प्रखंड अध्यक्षा रूपम देवी, महिषी प्रखंड अध्यक्षा बंटी देवी, सिमरीबख्तियारपुर प्रखंड अध्यक्षा रोशन खातुन, सलखुआ प्रखंड अध्यक्षा मीना देवी व कहरा प्रखंड अध्यक्षा के रूप में शारदा देवी का मनोनयन किया गया। इस मौके पर प्रदेश राज्य कार्यकारिणी सदस्य सुरेश प्रसाद यादव, प्रदेश बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ उपेन्द्र यादव, प्रदेश अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ महासचिव मीर हासिम, जिला प्रवक्ता अमरेन्द्र कुमार, जिला महासचिव मो नईमउद्दीन, जिला उपाध्यक्ष विनोद यादव, जिला महासचिव नाथेश्वर यादव, श्रमिक प्रकोष्ठ के मो युसुफ, महासचिव रमेश सिंह, सचिव गजेंद्र पासवान, पवन यादव, संजय स्वर्णकार, प्रो शंकर कुमार, आपदा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष मो सज्जाद आलम, उपेन्द्र यादव,  प्रखंड अध्यक्ष श्याम यादव, हैलाल अशरफ, रामरूप यादव, सुकुमार यादव, अमरेन्द्र यादव, राजेश सिंह मुन्ना, मोगल यादव, जयकुमार उर्फ मंटून सिंह, मो हैयात, मो जावेद, मो आसिफ अख्तर, शिवशंकर साह, मो हातीम, तेजनारायण यादव, मो हदीश आदि मौजूद थे।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) पार्टी के नया दफ्तर का उद्घाटन.........

विकास कुमार की रिपोर्ट ------
सहरसा जिले के पूरब बाजार जगदम्बा पेट्रोल पंप कोसी धर्मकांटा के समीप जिला राजद कार्यालय का प्रदेश उपाध्यक्ष सह कोसी प्रमंडल प्रभारी पूर्व मंत्री अशोक कुमार सिंह ने झंडोत्तोलन व फीता काटकर किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि लबें समय के बाद जिला राजद कार्यालय खोला गया है। 
पार्टी ने तय किया है कि सभी पार्टी पदाधिकारी एक एक दिन कार्यालय में बैठेंगे. आम नागरिक एवं कार्यकर्ता की समस्या को सुनकर उसका निदान किया जाएगा।
इस मौके पर प्रदेश राज्य कार्यकारिणी सदस्य सुरेश प्रसाद यादव, प्रदेश बुद्धिजीवी प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ उपेन्द्र यादव, प्रदेश अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ महासचिव मीर हासिम, जिला प्रवक्ता अमरेन्द्र कुमार, जिला महासचिव मो नईमउद्दीन, जिला उपाध्यक्ष विनोद यादव, जिला महासचिव नाथेश्वर यादव, महिला जिलाध्यक्ष विजयलक्ष्मी, श्रमिक प्रकोष्ठ के मो युसुफ, महासचिव रमेश सिंह, सचिव गजेंद्र पासवान, पवन यादव, संजय स्वर्णकार, प्रो शंकर कुमार, आपदा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष मो सज्जाद आलम, उपेन्द्र यादव, दीपमाला, नुतन देवी, प्रखंड अध्यक्ष श्याम यादव, हैलाल अशरफ, रामरूप यादव, सुकुमार यादव, अमरेन्द्र यादव, राजेश सिंह मुन्ना, मोगल यादव, जयकुमार उर्फ मंटून सिंह, मो हैयात, मो जावेद, मो आसिफ अख्तर, शिवशंकर साह, मो हातीम, तेजनारायण यादव, मो हदीश आदि मौजूद थे।

दुकानदार से लूटपाट

विकास कुमार की रिपोर्ट -----
सहरसा जिले के बलावाहाट चौक के समीप हरियो जाने वाली सड़क के पास किराना व मोबाइल दुकान चलाने वाले दो भाईयों पंकज साह व सुरेन्द्र साह के साथ मारपीट कर 76 हजार रुपये लूट लेने का मामला प्रकाश में आया है। वहीं बीचबचाव करने गयी सुरेन्द्र साह की पत्नी संजुला देवी के साथ भी मारपीट कर कपड़े फाड़ दिया और जेवरात छीन लिया। 
इस मामले में पीड़ित दुकानदार के छोटे भाई चंदन साह ने बताया कि गंगा साह, दीपक साह, विपीन साह, राजाराम सहित अन्य लोगों ने उसके दोनों भाईयों को दुकान से बाहर निकाल लिया और पुल के समीप ले जाकर लाठी, रड, फरसा, हथियार के बट से बुरी तरह घायल कर दिया औ
र पैसे लूटपाट कर लिया।
सभी घायलों का इलाज सदर अस्पताल में चल रहा है। घटना की जानकारी मिलते ही  मुखिया इंदल यादव, रंजन यादव सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने घायलों का हालचाल पूछा और प्रशासन से कारवाई करने की मांग की है।

फ़रवरी 20, 2017

पंच के फैसले पर टिकी लोगों की नजर....

देखना बेहद जरूरी होगा की आज भी लोग कितना करते हैं पंच की कद्र....
क्या सही मायने में आज भी पंच का फैसला होता है दूध की तरह साफ.....
क्या सच के साथ होगा पंच.... 
मो० अज़हर उद्दीन की रिपोर्ट--------
जमीनी विवाद में लोगों का आपस में उलझना या इस रंजिश में एक--दूसरें की जान तक ले लेने से लोग कतई गुरेज नहीं करते हैं । इस तरह के विवाद में लोग खुद कानून को हाथ में लेते नजर आते रहे हैं । सदर थाना के मसोमात पोखर के पास बैधनाथ मेहता और गिरीश महाराज के बीच चल रहे जमीनी विवाद में रविवार को पंच के द्धारा पंचायत की गयी. 
जिसमें वार्ड चैयरमैन राजू महतो, स्थानीय वार्ड पार्षद घनश्याम चौधरी, सुबोध साह, बम यादव और कारी अमीन, उपेंद्र भगत, सनोज यादव समेत शहर के दर्जनों गणमान्य लोग मौजूद थे । पंच के सामने विवादित जमीन की नापी कर पक्षों से सही फैसले के लिए कुछ दिनों का वक़्त माँगा गया। अब आगे देखना बेहद दिलचस्प होगा की पंच का फैसला सही दिशा में होता हैं या पंच पक्ष देखकर फैसला लेते हैं । अभी के समय में अगर लोग पंच के फैसले का ससम्मान इन्तजार करते दीखते हैं तो पंच भी अपनी गरिमा को कायम रखते हुए सही फैसला सुनावें। अगर ऐसा होता है तो, लोगों को एक--बार फिर पुरानी रीति--रिवाज का जलवा कायम होने के मुफीद संकेत मिलेंगे ।        
 

कारा अधीक्षक नपे,भेजे गए सासाराम

जेल में बन्द पूर्व सांसद आनंद मोहन ने उनपर लगाए थे गंभीर आरोप ..
तबादले से आनंद मोहन के समर्थकों में दौड़ी खुशी की लहर.......
बीते एक महीने से जेल का वातावरण था अशांत ........
मुकेश कुमार सिंह की दो टूक---
आखिरकार सहरसा मण्डल कारा के अधीक्षक नप ही गए । उन्हें सरकार सासाराम जेल अधीक्षक बनाकर सहरसा से चलता किया है। बताना लाजिमी है की सहरसा जेल में बन्द पूर्व सांसद आनंद मोहन ने उनपर अपनी ह्त्या करवाने की साजिश का ना केवल गंभीर आरोप लगाया था बल्कि एक सप्ताह तक ढ़ाई सौ से ज्यादा बंदियों के साथ मिलकर भूख हड़ताल भी की थी । बाद में सरकार इस मसले पर गंभीर हुयी थी और राज्य मुख्यालय से जेल के दो बड़े अधिकारी सहरसा जेल पहुंचकर पूर्व सांसद की भूख हड़ताल को खत्म कराया था ।
इस मामले में राज्य मुख्यालय ने एक सप्ताह पूर्व ही सहायक जेल उपाधीक्षक हरी नारायण प्रसाद को लक्खीसराय जेल और जेलर बिपिन कुमार सिंह को दाऊदनगर उपकारा भेजा था। इसके अलावे सात कक्षपाल का भी तबादला किया गया था ।सहरसा के नए जेल उपाधीक्षक शिव शंकर चौधरी को बनाया गया है ।पहले से ही यह तय था की काराधीक्षक संजीव कुमार भी नपेंगे ।लेकिन संजीव कुमार रुपया का बैग लेकर पटना में बैठे थे की सहरसा से उनका तबादला बिहार के किसी अच्छे जेल में हो ।आज सरकार की चिट्ठी निकली जिसमें उन्हें सहरसा से हटाकर सासाराम जेल अधीक्षक बनाया गया है ।जाहिर तौर पर संजीव कुमार ने नोटगिरी से बाजी मार ली ।सुरेन्द्र कुमार गुप्ता सहरसा के नए जेल अधीक्षक बने है ।इससे पहले सुरेन्द्र कुमार बांका जेल में  पदस्थापित थे ।
जेल अधीक्षक के तबादले से आनंद मोहन के समर्थकों के बीच ख़ुशी की लहर दौड़ गयी है ।
फ्रेंड्स ऑफ आनंद के प्रधान राष्ट्रीय महासचिव सह हम के प्रदेश युवा महासचिव राजन आनंद ने सरकार के इस फैसले का स्वागत किया है ।राजन आनंद ने कहा की एक महीने के भीतर जेल के अंदर चार बार पगली घंटी बजाकर आतातायी जेल अधीक्षक संजीव कुमार ने निरीह बन्दियों की भरपूर पिटाई की थी ।इस काराधीक्षक से पूर्व सांसद आनंद मोहन की जान को ख़तरा था ।जेल में खूंखार बंदी आपस में गुटबाजी करते थे जिसका काराधीक्षक विरोध करने की जगह हौसला आफजाई करते थे ।
श्री राजन ने कहा की पूर्व सांसद आनंद मोहन की सजा अब पूरी होने वाली है ।अब वे जेल से बाहर निकलेंगे ।जेल में बंद कुछ खूंखार अपराधी इसका नाजायज फायदा उठाना चाहते हैं ।जेल की पूरी स्थिति से सरकार और महामहिम राज्यपाल को अवगत करा दिया गया है ।इस तबादले का जो भी मायने हो,लेकिन हम यह ताल ठोंककर कहते हैं की जेल के भीतर की स्थिति अभी भी सामान्य नहीं है ।जेल अधिकारी के साथ--साथ पुलिस और प्रशासन के अधिकारी को भी जेल पर नजर रखनी होगी ।

*अपनी बात*

अपनी बात---थोड़ी भावनाओं की तासीर,थोड़ी दिल की रजामंदी और थोड़ी जिस्मानी धधक वाली मुहब्बत कई शाख पर बैठती है ।लेकिन रूहानी मुहब्बत ना केवल एक जगह काबिज और कायम रहती है बल्कि ताउम्र उसी इक शख्सियत के संग कुलाचें भरती है ।